मृग मरीचिका
दिल ही तो है… भागता ही रहता है… :)
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Tuesday, 27 September 2011
कभी कभी कुछ तो...
कभी कभी कुछ तो
कहने का मौका दिया करो..
चुप रहकर मेरी ज़बाँ पर
ताले ना लगा दिया करो ...
चाहती हूँ कर दूँ हर राह
आसान तुम्हारी..
बस तुम यूँ ना मेरी राहें
मुश्किल किया करो...
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